Livogrit Juice Buy Online खराब से खराब लिवर दुरुस्त होगा

इस पोस्ट में हम Patanjali Livogrit Juice के बारे में जानेंगे कि इसे आप कैसे घर पर बना सकते हैं या पतंजलि से मंगा सकते हैं इसका कीमत क्या है एवं इससे आपके लीवर में किस तरह से फायदा मिलता है इत्यादि इन सभी का जवाब पाने के लिए इस छोटे-से पोस्ट को अंत तक पढ़े।

Livogrit Juice क्या है?

लीवर के लगभग सभी तरह के समस्याओं को ठीक करने के लिए बना हुआ जूस को ही Livogrit Juice कहते हैं, ये नाम आपको स्वामी रामदेव जी के द्वारा सुनने को मिलेगा। पतंजलि वैलनेस या योग ग्राम में इलाज के लिए गए हुए लोगों को लिवोग्रिट जूस पिलाया जाता है ताकि उनके लीवर से संबंधित सभी समस्याएं समाप्त हो सके।

लिवो ग्रीट जूस में जिन-जिन आयुर्वेदिक औषधियां को मिलाया जाता है वो लीवर को दुरुस्त करने वाली औषधीयां होती है और उसके सेवन से लवर से जुड़ी समस्याएं समाप्त होती है।

घर पर लिवोग्रिट जूस कैसे बनाएं

भूमि आंवला, पुनर्नवा मकोय, श्योनाक (Trumpet Tree), एवं अरंडी के पत्ता इन सबका रस को ही लीवोग्रिट जूस कहा जाता है। अगर आपके लीवर में बहुत बड़ी समस्या है तो इस जूस को पीने मात्र से ही लिवर बहुत तेजी से ठीक होने लगता है।

लिवोग्रिट जूस बनाने के लिए भूई आंवला, पुनर्नवा, मकोय, श्योनाक, एवं अरेंड के पत्ता इन सबको कूट पीसकर इनका रस निकाल लें और इस जूस को अपने वैद्य या चिकित्सक के परामर्श के अनुसार रोगी को पिलाएं।

साथ में आप लिवो ग्रिट वटी जो की गोली के रूप में होती है उसे भी रोगी को दोनों टाइम खाली पेट दो-दो गोली या आवश्यकता अनुसार दे सकते हैं। लिवो ग्रिट वटी आपको पतंजलि स्टोर पर मिल जाएगा या आप चाहे तो ऑनलाइन भी मंगा सकते हैं।

भूई आंवला कैसा होता है

भूई आंवला

ऊपर दिए गए चित्र में भूई आंवला के पत्ता को देखकर शायद आप इसे पहचान लेंगे क्योंकि ये भारत में लगभग सभी क्षेत्रों में पाया जाता है। इसका स्वाद कसैला एवं मीठा होता है।

भूई आंवला को लीवर के लिए रामबाण औषधि माना जाता है लिवो ग्रिट जूस में इसके पत्तों का इस्तेमाल करके बनाया जाता है। इसका लेप बनाकर घाव में लगाने से घाव जल्दी भरता है एवं कुष्ठ रोगों में भी इस पौधे का उपयोग किया जाता है।

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पुनर्नवा कैसा होता है

पुनर्नवा

पुनर्नवा एक जड़ी बूटी पौधा होता है इसका इस्तेमाल लिवोग्रिट जूस बनाने में किया जाता है और ये लीवर के लिए बहुत अच्छा औषधि होता है लेकिन गर्मियों के मौसम में ये आपको नहीं दिखेगा क्योंकि ये सुख जाता है और बारिश आते ही फिर से इसका पौधा पनपने लगता हैं।

पतंजलि में पुनर्नवा का रस रोगी को दिया जाता है क्योंकि इसके औषधीय गुण लीवर को ठीक करने में मदद करते हैं और लिवोग्रिट जूस में पुनर्नवा के पत्तों का रस डाला जाता है।

मकोय कैसा होता है

मकोय

ऊपर चित्र को देखकर आप मकोय पौधे को पहचान सकते हैं इसका अंग्रेजी में नाम BLACK NIGHT OR NIGHT SHADE है इसमें छोटे-छोटे गोल-गोल फल निकलते हैं जो कच्चा होने पर हरे रंग के होते हैं और जब ये पक जाते हैं तो काले रंग के हो जाते हैं।

जब मकोय का फली पक जाता है तब इसे खाने में मीठा लगता है और छोटे बच्चे चाव से खाते हैं। लिवर में हो रही परेशानियों को ठीक करने के लिए मकोय का इस्तेमाल किया जाता है एवं पतंजलि में लिवोग्रिट जूस में भी मकोय को डाला जाता है।

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श्योनाक (Trumpet Tree) कैसा होता है

श्योनाक trumpet tree

लिवो ग्रीट जूस में श्योनाक के फल को भी डाला जाता है इसका फल तलवार जैसा होता है जिसे आप ऊपर चित्र में देख सकते हैं। इसे सिक्किम में टोटला बोला जाता है।

श्योनाक के पेड़ का छाल लीवर संबंधी रोगों में बहुत ही फायदेमंद होता है अगर किसी को पीलिया हुआ है तो उसे श्योनाक के छाल को कुट पीस कर पांच से 10 ग्राम रात को मिट्टी के बर्तन में डालकर भिगोया जाता है और फिर सुबह छान करके 200 से ढाई सौ मिलीग्राम देसी कपूर खाकर उस पानी को पिला दिया जाता है।

अरंडी के पत्ता कैसा होता है

अरंडी के पत्ता

अरंडी के पत्ते को अंग्रेजी में कैस्टर के नाम से जाना जाता है ये ज्यादातर बारिश के मौसम में होते हैं और बहुत ही तेजी से छोटे पौधे से बड़े पेड़ के रूप धारण कर लेते हैं। अरंडी के पत्ते लिवोग्रिट जूस बनाने में उपयोग किया जाता है जो लीवर के लिए रामबाण औषधि होता है।

अरंडी में काले काले फल भी होते हैं जिसका तेल निकाल कर कई कामों में उपयोग किया जाता है। अरंडी पौधे के पत्ता से लेकर फल तक सभी आयुर्वेदिक दवाओं में उपयोग किया जाता है।

लिवो ग्रिट वटी भी है लीवर के लिए काफी असरदार

लिवोग्रिट जूस के अलावा लिवोग्रिट वटी भी लीवर के लिए रामबाण औषधि है इसे स्वामी रामदेव जी दो-दो गोली सुबह शाम खाली पेट खाने के लिए बोलते हैं हम खुद भी लिवोग्रिट वटी अपने घर में रखते हैं एवं बच्चों से लेकर बड़ों तक जिनको लीवर की परेशानी हो उनको देते हैं।

आयुर्वेद में एक नियम को ध्यान में रखना चाहिए कि अगर आप आयुर्वेदिक दावाओं का सेवन कर रहे हैं तो फिर खान-पान पर भी कंट्रोल करना होता है तभी आयुर्वेदिक दवाएं सही ढंग से काम कर पाती है।

उदाहरण के लिए अगर आपके लीवर में परेशानी है और आप इसे ठीक करने के लिए आयुर्वेदिक दावाओं का सेवन कर रहे हैं तो फिर आपको भारी एवं तला भुना पदार्थ नहीं खाना चाहिए जहां तक हो सके खिचड़ी दलिया एवं हरा सब्जी वो भी बिना मसाले का ही खाएं।

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